श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 20: रावण का सीताजी को प्रलोभन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.20.12 
इदं ते चारु संजातं यौवनं ह्यतिवर्तते।
यदतीतं पुनर्नैति स्रोत: स्रोतस्विनामिव॥ १२॥
 
 
अनुवाद
‘तुम्हारा खिलता हुआ सुन्दर यौवन बीत रहा है। जो बीत जाता है, वह नदियों के प्रवाह के समान लौटकर नहीं आता।॥12॥
 
‘Your budding and beautiful youth is passing by. What passes by does not return like the flow of rivers.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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