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श्लोक 5.20.12  |
इदं ते चारु संजातं यौवनं ह्यतिवर्तते।
यदतीतं पुनर्नैति स्रोत: स्रोतस्विनामिव॥ १२॥ |
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| अनुवाद |
| ‘तुम्हारा खिलता हुआ सुन्दर यौवन बीत रहा है। जो बीत जाता है, वह नदियों के प्रवाह के समान लौटकर नहीं आता।॥12॥ |
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| ‘Your budding and beautiful youth is passing by. What passes by does not return like the flow of rivers.॥ 12॥ |
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