श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 2: लंकापुरी का वर्णन, उसमें प्रवेश करने के विषय में हनुमान जी का विचार, उनका लघुरूप से पुरी में प्रवेश तथा चन्द्रोदय का वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.2.6 
शाद्वलानि च नीलानि गन्धवन्ति वनानि च।
मधुमन्ति च मध्येन जगाम नगवन्ति च॥ ६॥
 
 
अनुवाद
रास्ते में वे हरी-भरी घास और अमृत से भरे वृक्षों तथा सुगंधित वनों को देखते हुए मध्य मार्ग से जा रहे थे।
 
On the way they were going along the middle path, seeing green grass and trees filled with nectar and fragrant forests.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)