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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 2: लंकापुरी का वर्णन, उसमें प्रवेश करने के विषय में हनुमान जी का विचार, उनका लघुरूप से पुरी में प्रवेश तथा चन्द्रोदय का वर्णन
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श्लोक 47
श्लोक
5.2.47
रावणस्य पुरीं रात्रौ प्रविश्य सुदुरासदाम्।
प्रविश्य भवनं सर्वं द्रक्ष्यामि जनकात्मजाम्॥ ४७॥
अनुवाद
यद्यपि रावण की नगरी में प्रवेश करना अत्यन्त कठिन है, फिर भी मैं रात्रि के समय उसमें प्रवेश कर सभी घरों में घुसकर जानकी की खोज करूंगा।'
Although it is very difficult to enter Ravana's city, yet I will enter it at night and enter all the houses and search for Janaki.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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