श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 2: लंकापुरी का वर्णन, उसमें प्रवेश करने के विषय में हनुमान जी का विचार, उनका लघुरूप से पुरी में प्रवेश तथा चन्द्रोदय का वर्णन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  5.2.36 
तां पुरीं तादृशीं दृष्ट्वा दुराधर्षां सुरासुरै:।
हनूमांश्चिन्तयामास विनि:श्वस्य मुहुर्मुहु:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
देवताओं और दानवों के लिए भी जीतना कठिन था, उस लंकापुरी को देखकर हनुमान्‌जी बार-बार गहरी साँसें लेकर इस प्रकार सोचने लगे-॥36॥
 
Seeing Lankapuri, which was difficult to conquer even for gods and demons, Hanuman ji took deep breaths again and again and started thinking like this -॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)