श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 2: लंकापुरी का वर्णन, उसमें प्रवेश करने के विषय में हनुमान जी का विचार, उनका लघुरूप से पुरी में प्रवेश तथा चन्द्रोदय का वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.2.19 
गिरिमूर्ध्नि स्थितां लंकां पाण्डुरैर्भवनै: शुभै:।
ददर्श स कपि: श्रीमान् पुरीमाकाशगामिव॥ १९॥
 
 
अनुवाद
महाप्रतापी हनुमान ने लंका को देखा, जो एक पर्वत की चोटी पर स्थित थी और सुंदर सफेद घरों से सुसज्जित थी, मानो वह आकाश में उड़ती हुई कोई नगरी हो।
 
The illustrious ape Hanuman saw Lanka, situated on the top of a mountain and adorned with beautiful white houses, as if it were a city flying in the sky.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)