श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 2: लंकापुरी का वर्णन, उसमें प्रवेश करने के विषय में हनुमान जी का विचार, उनका लघुरूप से पुरी में प्रवेश तथा चन्द्रोदय का वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.2.13 
संततान् विविधैर्वृक्षै: सर्वर्तुफलपुष्पितै:।
उद्यानानि च रम्याणि ददर्श कपिकुञ्जर:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उन जलाशयों के चारों ओर नाना प्रकार के वृक्ष फैले हुए थे जो सब ऋतुओं में फल और फूल देते थे। उस वानरराज ने वहाँ अनेक सुन्दर उद्यान भी देखे॥13॥
 
All around those water reservoirs were spread many kinds of trees bearing fruits and flowers in all seasons. That chief of the monkeys also saw many beautiful gardens there.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)