श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 2: लंकापुरी का वर्णन, उसमें प्रवेश करने के विषय में हनुमान जी का विचार, उनका लघुरूप से पुरी में प्रवेश तथा चन्द्रोदय का वर्णन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.2.12 
हंसकारण्डवाकीर्णा वापी: पद्मोत्पलावृता:।
आक्रीडान् विविधान् रम्यान् विविधांश्च जलाशयान्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हंसों और सारसों से भरी हुई, कमलों और कुमुदिनियों से आच्छादित अनेक बावड़ियाँ, नाना प्रकार के सुन्दर क्रीड़ास्थल और नाना प्रकार के जलाशय उनकी दृष्टि में आए ॥12॥
 
Many stepwells, filled with swans and cranes and covered with lotuses and lily plants, various beautiful playgrounds and water reservoirs of various kinds came into his sight. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)