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ramayan 5.19.9: जैसे नागराज की वधू मणि और मन्त्रों के प्रभाव से तड़पती है, वैसे ही सीता भी पति के वियोग में तड़पती हुई तड़प रही थी और उसी प्रकार तड़प रही थी, जैसे धुएँ के रंग वाले केतु ग्रह से पीड़ित रोहिणी तड़प रही थी॥9॥   |   ramayan सर्ग 5.19: रावण को देखकर दुःख, भय और चिन्ता में डूबी हुई सीता की अवस्था का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 19: रावण को देखकर दुःख, भय और चिन्ता में डूबी हुई सीता की अवस्था का वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.19.9 
चेष्टमानामथाविष्टां पन्नगेन्द्रवधूमिव।
धूप्यमानां ग्रहेणेव रोहिणीं धूमकेतुना॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जैसे नागराज की वधू मणि और मन्त्रों के प्रभाव से तड़पती है, वैसे ही सीता भी पति के वियोग में तड़पती हुई तड़प रही थी और उसी प्रकार तड़प रही थी, जैसे धुएँ के रंग वाले केतु ग्रह से पीड़ित रोहिणी तड़प रही थी॥9॥
 
Just as the bride of the King of Snakes writhes in agony due to the power of gems and mantras, Sita too was writhing in agony due to the separation from her husband and was tormented like Rohini who was afflicted by the planet Ketu which had the colour of smoke.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)