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ramayan 5.19.4-5: राक्षसियों के संरक्षण में रहने वाली विदेहराजकुमारी सीता अत्यंत दुःखी और दुखी हो रही थीं। समुद्र में डूबी हुई नाव के समान वे शोकसागर में डूबी हुई थीं। उस अवस्था में दसमुख वाले रावण ने उनकी ओर देखा। वे बिना बिछौने के खुली भूमि पर बैठी हुई थीं और कटी हुई वृक्ष की शाखा के समान पृथ्वी पर गिरी हुई प्रतीत हो रही थीं। वे अत्यंत कठोर व्रत का पालन कर रही थीं॥4-5॥   |   ramayan सर्ग 5.19: रावण को देखकर दुःख, भय और चिन्ता में डूबी हुई सीता की अवस्था का वर्णन   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 19: रावण को देखकर दुःख, भय और चिन्ता में डूबी हुई सीता की अवस्था का वर्णन  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  5.19.4-5 
दशग्रीवस्तु वैदेहीं रक्षितां राक्षसीगणै:।
ददर्श दीनां दु:खार्तां नावं सन्नामिवार्णवे॥ ४॥
असंवृतायामासीनां धरण्यां संशितव्रताम्।
छिन्नां प्रपतितां भूमौ शाखामिव वनस्पते:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
राक्षसियों के संरक्षण में रहने वाली विदेहराजकुमारी सीता अत्यंत दुःखी और दुखी हो रही थीं। समुद्र में डूबी हुई नाव के समान वे शोकसागर में डूबी हुई थीं। उस अवस्था में दसमुख वाले रावण ने उनकी ओर देखा। वे बिना बिछौने के खुली भूमि पर बैठी हुई थीं और कटी हुई वृक्ष की शाखा के समान पृथ्वी पर गिरी हुई प्रतीत हो रही थीं। वे अत्यंत कठोर व्रत का पालन कर रही थीं॥4-5॥
 
Living under the guard of the demonesses, the princess of Videha, Sita, was feeling very miserable and sad. She was immersed in the ocean of sorrow like a boat sunk in the sea. In that condition, the ten-faced Ravana looked at her. She was sitting on the open ground without any bedding and looked like a branch of a tree cut and fallen on the earth. She was observing a very strict fast.॥4-5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)