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ramayan 5.18.3: तत्पश्चात् महाबली, पराक्रमी और दस सिर वाले रावण को शुभ वाद्यों और मधुर वचनों द्वारा जगाया गया॥3॥   |   ramayan सर्ग 5.18: अपनी स्त्रियों से घिरे हुए रावण का अशोकवाटिका में आगमन और हनुमान जी का उसे देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 18: अपनी स्त्रियों से घिरे हुए रावण का अशोकवाटिका में आगमन और हनुमान जी का उसे देखना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.18.3 
अथ मंगलवादित्रै: शब्दै: श्रोत्रमनोहरै:।
प्राबोध्यत महाबाहुर्दशग्रीवो महाबल:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् महाबली, पराक्रमी और दस सिर वाले रावण को शुभ वाद्यों और मधुर वचनों द्वारा जगाया गया॥3॥
 
Thereafter, the mighty, powerful and ten-headed Ravana was awakened by auspicious musical instruments and pleasant words. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)