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ramayan 5.18.22: उसके आगे-आगे सुगन्धित तेल से भीगी हुई और स्त्रियों के हाथों में पकड़ी हुई बहुत-सी मशालें जल रही थीं, जिनसे वह सब ओर से प्रकाशित हो रहा था ॥22॥   |   ramayan सर्ग 5.18: अपनी स्त्रियों से घिरे हुए रावण का अशोकवाटिका में आगमन और हनुमान जी का उसे देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 18: अपनी स्त्रियों से घिरे हुए रावण का अशोकवाटिका में आगमन और हनुमान जी का उसे देखना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.18.22 
दीपिकाभिरनेकाभि: समन्तादवभासितम्।
गन्धतैलावसिक्ताभिर्ध्रियमाणाभिरग्रत:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
उसके आगे-आगे सुगन्धित तेल से भीगी हुई और स्त्रियों के हाथों में पकड़ी हुई बहुत-सी मशालें जल रही थीं, जिनसे वह सब ओर से प्रकाशित हो रहा था ॥22॥
 
In front of him were burning many torches soaked in perfumed oil and held in the hands of women, by which he was being illuminated from all sides. ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)