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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 18: अपनी स्त्रियों से घिरे हुए रावण का अशोकवाटिका में आगमन और हनुमान जी का उसे देखना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.18.21 
तं चाप्रतिमकर्माणमचिन्त्यबलपौरुषम्।
द्वारदेशमनुप्राप्तं ददर्श हनुमान् कपि:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
इसके अलावा, वानर योद्धा हनुमान ने रावण को देखा, जो अद्वितीय कर्म कर रहा था और अकल्पनीय शक्ति और वीरता से संपन्न था, जो अशोक उद्यान के द्वार पर पहुँच गया था।
 
Also, Hanuman the monkey warrior saw Ravana, who was performing unparalleled deeds and was endowed with inconceivable strength and valour, who had reached the gates of the Ashoka garden.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)