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ramayan 5.18.2: रात्रि के अंतिम प्रहर में वेदों के छह अंगों सहित जानने में निपुण तथा उत्तम यज्ञ करने वाले ब्रह्मराक्षसों के घरों से वेदपाठ की ध्वनि आने लगी, जिसे हनुमान ने सुना।   |   ramayan सर्ग 5.18: अपनी स्त्रियों से घिरे हुए रावण का अशोकवाटिका में आगमन और हनुमान जी का उसे देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.18.2 
षडंगवेदविदुषां क्रतुप्रवरयाजिनाम्।
शुश्राव ब्रह्मघोषान् स विरात्रे ब्रह्मरक्षसाम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
रात्रि के अंतिम प्रहर में वेदों के छह अंगों सहित जानने में निपुण तथा उत्तम यज्ञ करने वाले ब्रह्मराक्षसों के घरों से वेदपाठ की ध्वनि आने लगी, जिसे हनुमान ने सुना।
 
In the last hour of the night, the sound of recitation of Vedas started coming from the houses of Brahma-Rakshasas who were experts in knowing the Vedas including its six parts and who performed supreme yagyas, which Hanuman heard.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)