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ramayan 5.18.13: कोई चतुर और चालाक युवती अपने दाहिने हाथ में रस से भरा रत्नजटित एक चमकता हुआ घड़ा पकड़े हुए थी।   |   ramayan सर्ग 5.18: अपनी स्त्रियों से घिरे हुए रावण का अशोकवाटिका में आगमन और हनुमान जी का उसे देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.18.13 
काचिद् रत्नमयीं पात्रीं पूर्णां पानस्य भ्राजतीम्।
दक्षिणा दक्षिणेनैव तदा जग्राह पाणिना॥ १३॥
 
 
अनुवाद
कोई चतुर और चालाक युवती अपने दाहिने हाथ में रस से भरा रत्नजटित एक चमकता हुआ घड़ा पकड़े हुए थी।
 
Some clever and cunning young woman was holding in her right hand a gleaming pitcher studded with gems filled with juice.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)