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ramayan 5.18.11: उनमें से कुछ युवतियाँ सोने के दीपक लिए हुए थीं, कुछ के हाथ में पंखे थे, और कुछ के हाथ में ताड़ के पंखे थे।   |   ramayan सर्ग 5.18: अपनी स्त्रियों से घिरे हुए रावण का अशोकवाटिका में आगमन और हनुमान जी का उसे देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.18.11 
दीपिका: काञ्चनी: काश्चिज्जगृहुस्तत्र योषित:।
वालव्यजनहस्ताश्च तालवृन्तानि चापरा:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उनमें से कुछ युवतियाँ सोने के दीपक लिए हुए थीं, कुछ के हाथ में पंखे थे, और कुछ के हाथ में ताड़ के पंखे थे।
 
Some of those young women were carrying golden lamps. Some had fans in their hands and some had palm fans.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)