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ramayan 5.18.10: जैसे देवताओं और गन्धर्वों की स्त्रियाँ भगवान इन्द्र के पीछे-पीछे जाती हैं, उसी प्रकार लगभग सौ सुन्दर स्त्रियाँ अशोक वन में जाते समय पुलस्त्यनन्दन रावण के पीछे-पीछे चलीं॥10॥   |   ramayan सर्ग 5.18: अपनी स्त्रियों से घिरे हुए रावण का अशोकवाटिका में आगमन और हनुमान जी का उसे देखना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.18.10 
अंगना: शतमात्रं तु तं व्रजन्तमनुव्रजन्।
महेन्द्रमिव पौलस्त्यं देवगन्धर्वयोषित:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जैसे देवताओं और गन्धर्वों की स्त्रियाँ भगवान इन्द्र के पीछे-पीछे जाती हैं, उसी प्रकार लगभग सौ सुन्दर स्त्रियाँ अशोक वन में जाते समय पुलस्त्यनन्दन रावण के पीछे-पीछे चलीं॥10॥
 
Just as the women of the gods and Gandharvas follow Lord Indra, in the same way about a hundred beautiful women followed Ravana, the son of Pulastyanandan, while going to the Ashoka forest. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)