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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 17: भयंकर राक्षसियों से घिरी हुई सीता के दर्शन से हनुमान जी का प्रसन्न होना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.17.8 
ह्रस्वां दीर्घां च कुब्जां च विकटां वामनां तथा।
करालां भुग्नवक्त्रां च पिंगाक्षीं विकृताननाम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
कुछ छोटे थे, कुछ लंबे थे, कुछ कुबड़े थे, कुछ टेढ़े थे, कुछ अंधे थे, कुछ राक्षसी थे, कुछ के चेहरे टेढ़े थे, कुछ की आंखें पीली थीं और कुछ के चेहरे भयानक थे।
 
Some were short, some were tall, some were hunchbacked, some were crooked, some were blind, some were monstrous, some had crooked faces, some had yellow eyes and some had horrible faces.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)