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ramayan 5.17.2: शुद्ध कान्ति वाले चन्द्रमा अपनी शीतल किरणों से पवनपुत्र हनुमान की सेवा करने लगे, मानो सीता के दर्शन कराने में उनकी सहायता कर रहे हों ॥2॥   |   ramayan सर्ग 5.17: भयंकर राक्षसियों से घिरी हुई सीता के दर्शन से हनुमान जी का प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 17: भयंकर राक्षसियों से घिरी हुई सीता के दर्शन से हनुमान जी का प्रसन्न होना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.17.2 
साचिव्यमिव कुर्वन् स प्रभया निर्मलप्रभ:।
चन्द्रमा रश्मिभि: शीतै: सिषेवे पवनात्मजम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
शुद्ध कान्ति वाले चन्द्रमा अपनी शीतल किरणों से पवनपुत्र हनुमान की सेवा करने लगे, मानो सीता के दर्शन कराने में उनकी सहायता कर रहे हों ॥2॥
 
The moon, having pure radiance, began to serve Hanuman, the son of the wind, with its cool rays, as if helping him in getting the darshan of Sita. ॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)