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ramayan 5.17.15-16: किसी के हाथ में भाले थे, किसी के हाथ में गदाएँ थीं। कुछ क्रोधी थीं, तो कुछ को झगड़ा प्रिय था। धुएँ के समान केश और विकृत मुख वाली अनेक भयानक राक्षसियाँ सदैव मदिरापान करती रहती थीं। मदिरा और मांस उन्हें प्रिय थे॥15-16॥   |   ramayan सर्ग 5.17: भयंकर राक्षसियों से घिरी हुई सीता के दर्शन से हनुमान जी का प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 17: भयंकर राक्षसियों से घिरी हुई सीता के दर्शन से हनुमान जी का प्रसन्न होना  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  5.17.15-16 
शूलमुद‍्गरहस्ताश्च क्रोधना: कलहप्रिया:॥ १५॥
कराला धूम्रकेशिन्यो राक्षसीर्विकृतानना:।
पिबन्ति सततं पानं सुरामांससदाप्रिया:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
किसी के हाथ में भाले थे, किसी के हाथ में गदाएँ थीं। कुछ क्रोधी थीं, तो कुछ को झगड़ा प्रिय था। धुएँ के समान केश और विकृत मुख वाली अनेक भयानक राक्षसियाँ सदैव मदिरापान करती रहती थीं। मदिरा और मांस उन्हें प्रिय थे॥15-16॥
 
Some had spears in their hands, some had maces. Some were short-tempered, some loved quarrels. Many horrific demonesses with smoke-like hair and deformed faces were always drinking alcohol. Wine and meat were their favourites.॥15-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)