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ramayan 5.17.14-15h: कुछ के मुँह और आँखें बहुत बड़ी थीं, कुछ के मुँह में बड़ी-बड़ी जीभें थीं और कई ऐसे राक्षस थे जिनके चेहरे बकरे, हाथी, गाय, सूअर, घोड़े, ऊँट और गधे जैसे थे। इसलिए वे देखने में बहुत डरावने थे।   |   ramayan सर्ग 5.17: भयंकर राक्षसियों से घिरी हुई सीता के दर्शन से हनुमान जी का प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 17: भयंकर राक्षसियों से घिरी हुई सीता के दर्शन से हनुमान जी का प्रसन्न होना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  5.17.14-15h 
अतिमात्रास्यनेत्राश्च दीर्घजिह्वाननास्तथा।
अजामुखीर्हस्तिमुखीर्गोमुखी: सूकरीमुखी:॥ १४॥
हयोष्ट्रखरवक्त्राश्च राक्षसीर्घोरदर्शना:।
 
 
अनुवाद
कुछ के मुँह और आँखें बहुत बड़ी थीं, कुछ के मुँह में बड़ी-बड़ी जीभें थीं और कई ऐसे राक्षस थे जिनके चेहरे बकरे, हाथी, गाय, सूअर, घोड़े, ऊँट और गधे जैसे थे। इसलिए वे देखने में बहुत डरावने थे।
 
Some had very large mouths and eyes, some had large tongues in their mouths and there were many such demons who had faces like those of goats, elephants, cows, pigs, horses, camels and donkeys. That is why they were very scary to look at. 14 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)