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ramayan 5.17.12: किसी के नथुने बहुत बड़े थे और किसी के तिरछे थे। किसी की नाक ही नहीं थी। किसी की नाक हाथी की सूंड के समान थी और किसी के माथे पर नथुने थे, जिनसे वे साँस लेते थे॥12॥   |   ramayan सर्ग 5.17: भयंकर राक्षसियों से घिरी हुई सीता के दर्शन से हनुमान जी का प्रसन्न होना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.17.12 
अतिनासाश्च काश्चिच्च तिर्यङ्नासा अनासिका:।
गजसंनिभनासाश्च ललाटोच्छ्वासनासिका:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
किसी के नथुने बहुत बड़े थे और किसी के तिरछे थे। किसी की नाक ही नहीं थी। किसी की नाक हाथी की सूंड के समान थी और किसी के माथे पर नथुने थे, जिनसे वे साँस लेते थे॥12॥
 
Some had very large nostrils and some had slanted ones. Some had no noses at all. Some had noses like an elephant's trunk and some had nostrils on their foreheads, through which they used to breathe.॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)