श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 17: भयंकर राक्षसियों से घिरी हुई सीता के दर्शन से हनुमान जी का प्रसन्न होना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.17.11 
एकहस्तैकपादाश्च खरकर्ण्यश्वकर्णिका:।
गोकर्णीर्हस्तिकर्णीश्च हरिकर्णीस्तथापरा:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
किसी के एक हाथ थे, किसी के एक पैर थे। किसी के कान गधे के समान थे, किसी के घोड़े के समान। किसी के कान गाय, हाथी और सिंह के समान थे॥11॥
 
Some had one hand, some had one leg. Some had ears like those of donkeys, some like those of horses. Some had ears that looked like those of cows, elephants and lions.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)