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ramayan 5.16.18: धर्मात्मा, कृतज्ञ और आत्मज्ञानी भगवान श्री राम की प्रिय पत्नी सीता इस समय राक्षसों के प्रभाव में पड़ गई हैं॥18॥   |   ramayan सर्ग 5.16: हनुमान जी का मन-ही-मन सीताजी के शील और सौन्दर्य की सराहना करते हुए उन्हें कष्ट में पड़ी देख स्वयं भी उनके लिये शोक करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 16: हनुमान जी का मन-ही-मन सीताजी के शील और सौन्दर्य की सराहना करते हुए उन्हें कष्ट में पड़ी देख स्वयं भी उनके लिये शोक करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.16.18 
धर्मज्ञस्य कृतज्ञस्य रामस्य विदितात्मन:।
इयं सा दयिता भार्या राक्षसीवशमागता॥ १८॥
 
 
अनुवाद
धर्मात्मा, कृतज्ञ और आत्मज्ञानी भगवान श्री राम की प्रिय पत्नी सीता इस समय राक्षसों के प्रभाव में पड़ गई हैं॥18॥
 
Sita, the beloved wife of the religious, grateful and enlightened Lord Shri Ram, has fallen under the influence of demons at this time. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)