Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.16.17: यह प्रसिद्ध पुत्रवधू उन्हीं राजा दशरथ की ज्येष्ठ पुत्रवधू है जो अत्यंत वीर, उत्तम आचरण वाले तथा युद्ध से कभी पीछे न हटने वाले थे ॥17॥   |   ramayan सर्ग 5.16: हनुमान जी का मन-ही-मन सीताजी के शील और सौन्दर्य की सराहना करते हुए उन्हें कष्ट में पड़ी देख स्वयं भी उनके लिये शोक करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 16: हनुमान जी का मन-ही-मन सीताजी के शील और सौन्दर्य की सराहना करते हुए उन्हें कष्ट में पड़ी देख स्वयं भी उनके लिये शोक करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.16.17 
विक्रान्तस्यार्यशीलस्य संयुगेष्वनिवर्तिन:।
स्नुषा दशरथस्यैषा ज्येष्ठा राज्ञो यशस्विनी॥ १७॥
 
 
अनुवाद
यह प्रसिद्ध पुत्रवधू उन्हीं राजा दशरथ की ज्येष्ठ पुत्रवधू है जो अत्यंत वीर, उत्तम आचरण वाले तथा युद्ध से कभी पीछे न हटने वाले थे ॥17॥
 
This famous daughter-in-law is the eldest daughter-in-law of the same King Dasharatha who was extremely brave, had excellent morals and never backed down from war. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)