श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  5.15.54 
एवं सीतां तथा दृष्ट्वा हृष्ट: पवनसम्भव:।
जगाम मनसा रामं प्रशशंस च तं प्रभुम्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
सीता को उस अवस्था में देखकर पवनपुत्र हनुमान्‌जी बहुत प्रसन्न हुए। वे मन ही मन भगवान् राम के पास गए और उनका चिन्तन करने लगे तथा सीता जैसी पतिव्रता स्त्री को पत्नी रूप में पाकर अपने सौभाग्य की स्तुति करने लगे॥54॥
 
Hanuman, the son of the wind, was very happy to see Sita in that condition. He went to Lord Rama in his mind and started thinking about him and started praising his good fortune of getting a pious lady like Sita as his wife. ॥ 54॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे पञ्चदश: सर्ग॥ १५॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें पंद्रहवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ १५॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)