श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 15: वन की शोभा देखते हुए हनुमान जी का एक चैत्यप्रासाद (मन्दिर) के पास सीता को दयनीय अवस्था में देखना, पहचानना और प्रसन्न होना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.15.1 
स वीक्षमाणस्तत्रस्थो मार्गमाणश्च मैथिलीम्।
अवेक्षमाणश्च महीं सर्वां तामन्ववैक्षत॥ १॥
 
 
अनुवाद
उस अशोक वृक्ष पर बैठकर हनुमानजी ने सम्पूर्ण वन में चारों ओर दृष्टि डाली और वहाँ की भूमि पर दृष्टि डालकर सीता की खोज की॥1॥
 
Sitting on that Ashoka tree, Hanuman looked around the entire forest and looked at the land there in search of Sita.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)