Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.14.8: वह उद्यान ऐसा था कि लोग वहाँ आकर सदैव प्रसन्न रहते थे। हिरण और पक्षी मदमस्त रहते थे। मदमस्त मोरों की आवाजें वहाँ निरंतर गूँजती रहती थीं और तरह-तरह के पक्षी वहाँ निवास करते थे। | ramayan सर्ग 5.14: हनुमान जी का अशोकवाटिका में प्रवेश करके उसकी शोभा देखना तथा एक अशोकवृक्ष पर छिपे रहकर वहीं से सीता का अनुसन्धान करना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह उद्यान ऐसा था कि लोग वहाँ आकर सदैव प्रसन्न रहते थे। हिरण और पक्षी मदमस्त रहते थे। मदमस्त मोरों की आवाजें वहाँ निरंतर गूँजती रहती थीं और तरह-तरह के पक्षी वहाँ निवास करते थे।
That garden was such that people always felt happy on visiting it. Deer and birds became intoxicated. The cries of intoxicated peacocks kept echoing there continuously and various kinds of birds resided there.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥