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ramayan 5.14.52: ऐसा विचार करके महात्मा हनुमान जी नरेन्द्र की पत्नी सीता के शुभ आगमन की प्रतीक्षा करने के लिए तत्पर हो गए और सुन्दर पुष्पों से सुशोभित तथा घने पत्तों वाले उस अशोक वृक्ष पर छिपकर सम्पूर्ण वन को देखते रहे॥52॥   |   ramayan सर्ग 5.14: हनुमान जी का अशोकवाटिका में प्रवेश करके उसकी शोभा देखना तथा एक अशोकवृक्ष पर छिपे रहकर वहीं से सीता का अनुसन्धान करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 14: हनुमान जी का अशोकवाटिका में प्रवेश करके उसकी शोभा देखना तथा एक अशोकवृक्ष पर छिपे रहकर वहीं से सीता का अनुसन्धान करना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  5.14.52 
एवं तु मत्वा हनुमान् महात्मा
प्रतीक्षमाणो मनुजेन्द्रपत्नीम्।
अवेक्षमाणश्च ददर्श सर्वं
सुपुष्पिते पर्णघने निलीन:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
ऐसा विचार करके महात्मा हनुमान जी नरेन्द्र की पत्नी सीता के शुभ आगमन की प्रतीक्षा करने के लिए तत्पर हो गए और सुन्दर पुष्पों से सुशोभित तथा घने पत्तों वाले उस अशोक वृक्ष पर छिपकर सम्पूर्ण वन को देखते रहे॥52॥
 
Thinking like this, Mahatma Hanuman ji was ready to wait for the auspicious arrival of Narendra's wife Sita and kept looking at the entire forest while hiding on that Ashoka tree decorated with beautiful flowers and having dense leaves. 52॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे चतुर्दश: सर्ग:॥ १४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें चौदहवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ १४॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)