Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.14.48: श्री रामजी की प्रिय पत्नी, पतिव्रता और पतिव्रता जनकनन्दी सीताजी को वन के पशुओं से सदैव प्रेम रहा होगा। (अतः उनका वन में विचरण करना स्वाभाविक है, अतः यहाँ उनके दर्शन की संभावना है।)॥48॥ | ramayan सर्ग 5.14: हनुमान जी का अशोकवाटिका में प्रवेश करके उसकी शोभा देखना तथा एक अशोकवृक्ष पर छिपे रहकर वहीं से सीता का अनुसन्धान करना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्री रामजी की प्रिय पत्नी, पतिव्रता और पतिव्रता जनकनन्दी सीताजी को वन के पशुओं से सदैव प्रेम रहा होगा। (अतः उनका वन में विचरण करना स्वाभाविक है, अतः यहाँ उनके दर्शन की संभावना है।)॥48॥
‘Sri Ram's beloved wife, the virtuous and faithful Janakanandini Sita must have always loved the forest animals. (Therefore, it is natural for her to wander in the forest, and hence, there is a possibility of seeing her here.)॥ 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥