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ramayan 5.14.47: सुन्दर नेत्रों वाली देवी सीता भगवान राम के वियोग के दुःख से अत्यन्त व्याकुल होंगी। उन्हें वन से सदैव प्रेम रहा है, अतः वे वन में विचरण करती हुई यहाँ अवश्य आएंगी॥ 47॥   |   ramayan सर्ग 5.14: हनुमान जी का अशोकवाटिका में प्रवेश करके उसकी शोभा देखना तथा एक अशोकवृक्ष पर छिपे रहकर वहीं से सीता का अनुसन्धान करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 14: हनुमान जी का अशोकवाटिका में प्रवेश करके उसकी शोभा देखना तथा एक अशोकवृक्ष पर छिपे रहकर वहीं से सीता का अनुसन्धान करना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  5.14.47 
रामशोकाभिसंतप्ता सा देवी वामलोचना।
वनवासरता नित्यमेष्यते वनचारिणी॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
सुन्दर नेत्रों वाली देवी सीता भगवान राम के वियोग के दुःख से अत्यन्त व्याकुल होंगी। उन्हें वन से सदैव प्रेम रहा है, अतः वे वन में विचरण करती हुई यहाँ अवश्य आएंगी॥ 47॥
 
The beautiful-eyed goddess Sita will be very distressed by the grief of separation from Lord Rama. She has always loved the forest, so she will definitely come here while wandering in the forest.॥ 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)