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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 14: हनुमान जी का अशोकवाटिका में प्रवेश करके उसकी शोभा देखना तथा एक अशोकवृक्ष पर छिपे रहकर वहीं से सीता का अनुसन्धान करना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  5.14.46 
अथवा मृगशावाक्षी वनस्यास्य विचक्षणा।
वनमेष्यति साद्येह रामचिन्तासुकर्शिता॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
'अथवा, मृग-शावक के समान नेत्रों वाली, इस वन की विशेषताओं को अच्छी तरह जानने वाली सीता आज इस तालाब के किनारे इस वन में अवश्य आएगी; क्योंकि श्री रामजी के वियोग की चिन्ता से वह अत्यन्त क्षीण हो गई होगी (और इस सुन्दर स्थान पर आकर उसकी चिन्ता कुछ कम हो जाएगी)॥ 46॥
 
‘Or, Sita, having the eyes of a deer-cub, who is well versed in the knowledge of the specialities of this forest, will certainly come to this forest on the banks of this pond today; because she would have become very thin due to the worry of separation from Shri Rama (and her worry will be somewhat reduced by coming to this beautiful place).॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)