Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 5.14.45: रघुनाथजी की प्रिय रानी रामा, धर्मपरायण और पतिव्रता जानकी, वन में विचरण करने में अत्यन्त कुशल हैं। वे अवश्य यहाँ आएंगी। 45.   |   ramayan सर्ग 5.14: हनुमान जी का अशोकवाटिका में प्रवेश करके उसकी शोभा देखना तथा एक अशोकवृक्ष पर छिपे रहकर वहीं से सीता का अनुसन्धान करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 14: हनुमान जी का अशोकवाटिका में प्रवेश करके उसकी शोभा देखना तथा एक अशोकवृक्ष पर छिपे रहकर वहीं से सीता का अनुसन्धान करना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  5.14.45 
सा रामा राजमहिषी राघवस्य प्रिया सती।
वनसंचारकुशला ध्रुवमेष्यति जानकी॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
रघुनाथजी की प्रिय रानी रामा, धर्मपरायण और पतिव्रता जानकी, वन में विचरण करने में अत्यन्त कुशल हैं। वे अवश्य यहाँ आएंगी। 45.
 
Raghunathji's beloved Queen Rama, the virtuous and faithful Janaki, is very skilled in roaming around in the forest. She will certainly come here. 45.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)