Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.14.31: तभी महावानरों ने देखा कि नदी का जल प्रवाह वृक्षों की शाखाओं से टकराकर पीछे की ओर मुड़ गया है। मानो प्रसन्न प्रेयसी पुनः अपने प्रियतम की सेवा कर रही हो। | ramayan सर्ग 5.14: हनुमान जी का अशोकवाटिका में प्रवेश करके उसकी शोभा देखना तथा एक अशोकवृक्ष पर छिपे रहकर वहीं से सीता का अनुसन्धान करना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुनरावृत्ततोयां च ददर्श स महाकपि:।
प्रसन्नामिव कान्तस्य कान्तां पुनरुपस्थिताम्॥ ३१॥
अनुवाद
तभी महावानरों ने देखा कि नदी का जल प्रवाह वृक्षों की शाखाओं से टकराकर पीछे की ओर मुड़ गया है। मानो प्रसन्न प्रेयसी पुनः अपने प्रियतम की सेवा कर रही हो।
Then the great apes saw that the flow of the river water had turned backwards after hitting the branches of the trees. It was as if the happy beloved was once again serving her beloved.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥