Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.14.30: नदी के तट पर स्थित वृक्ष, जिनकी शाखाएँ झुककर जल को स्पर्श कर रही थीं, नदी की शोभा इस प्रकार बढ़ा रहे थे मानो कोई युवती अपने प्रेमी से विरक्त होकर अन्यत्र जा रही हो और उसे उसकी प्रिय सखियाँ आगे बढ़ने से रोक रही हों ॥30॥ | ramayan सर्ग 5.14: हनुमान जी का अशोकवाटिका में प्रवेश करके उसकी शोभा देखना तथा एक अशोकवृक्ष पर छिपे रहकर वहीं से सीता का अनुसन्धान करना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नदी के तट पर स्थित वृक्ष, जिनकी शाखाएँ झुककर जल को स्पर्श कर रही थीं, नदी की शोभा इस प्रकार बढ़ा रहे थे मानो कोई युवती अपने प्रेमी से विरक्त होकर अन्यत्र जा रही हो और उसे उसकी प्रिय सखियाँ आगे बढ़ने से रोक रही हों ॥30॥
The trees on the river bank, whose branches bent down and touched the water, were enhancing the beauty of the river as if a young girl, upset with her lover and going elsewhere, was being stopped by her lovely friends from proceeding further. ॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥