Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.14.25: किनारे पर वृक्षों से सुशोभित, अमृत के समान मधुर और सुख देने वाले जल से परिपूर्ण, अनेक बड़ी-बड़ी नदियाँ उन बावड़ियों को सब ओर से निरन्तर पोषित करती रहती थीं (उन्हें स्वच्छ जल से परिपूर्ण रखती थीं॥ 25॥ | ramayan सर्ग 5.14: हनुमान जी का अशोकवाटिका में प्रवेश करके उसकी शोभा देखना तथा एक अशोकवृक्ष पर छिपे रहकर वहीं से सीता का अनुसन्धान करना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
किनारे पर वृक्षों से सुशोभित, अमृत के समान मधुर और सुख देने वाले जल से परिपूर्ण, अनेक बड़ी-बड़ी नदियाँ उन बावड़ियों को सब ओर से निरन्तर पोषित करती रहती थीं (उन्हें स्वच्छ जल से परिपूर्ण रखती थीं॥ 25॥
Numerous large rivers, adorned with trees on the banks and filled with water as sweet as nectar and giving pleasure, were constantly nourishing those stepwells from all sides (keeping them filled with clean water).॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥