Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 5.14.17: पवनपुत्र हनुमानजी द्वारा हिलाए गए उन वृक्षों में केवल शाखाएँ ही रह गईं, क्योंकि उनमें फल-फूल नहीं थे; यहाँ तक कि पक्षियों के समूह भी उन्हें छोड़ गए थे। उस अवस्था में वे समस्त प्राणियों के लिए दुर्गम (अनुपयोगी) हो गए थे॥17॥ | ramayan सर्ग 5.14: हनुमान जी का अशोकवाटिका में प्रवेश करके उसकी शोभा देखना तथा एक अशोकवृक्ष पर छिपे रहकर वहीं से सीता का अनुसन्धान करना । ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पवनपुत्र हनुमानजी द्वारा हिलाए गए उन वृक्षों में केवल शाखाएँ ही रह गईं, क्योंकि उनमें फल-फूल नहीं थे; यहाँ तक कि पक्षियों के समूह भी उन्हें छोड़ गए थे। उस अवस्था में वे समस्त प्राणियों के लिए दुर्गम (अनुपयोगी) हो गए थे॥17॥
Those trees shaken by Hanuman, the son of wind, were left with only branches as they had no fruits or flowers; even the flocks of birds had left them. In that state they had become inaccessible (unserviceable) for all living beings.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥