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ramayan 5.14.11: उस समय पवनपुत्र हनुमान्‌जी उन पुष्पों से आच्छादित होकर ऐसे शोभायमान हो रहे थे मानो उस अशोक वन में पुष्पों से बना हुआ पर्वत शोभायमान हो रहा हो ॥11॥   |   ramayan सर्ग 5.14: हनुमान जी का अशोकवाटिका में प्रवेश करके उसकी शोभा देखना तथा एक अशोकवृक्ष पर छिपे रहकर वहीं से सीता का अनुसन्धान करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 14: हनुमान जी का अशोकवाटिका में प्रवेश करके उसकी शोभा देखना तथा एक अशोकवृक्ष पर छिपे रहकर वहीं से सीता का अनुसन्धान करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.14.11 
पुष्पावकीर्ण: शुशुभे हनूमान् मारुतात्मज:।
अशोकवनिकामध्ये यथा पुष्पमयो गिरि:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उस समय पवनपुत्र हनुमान्‌जी उन पुष्पों से आच्छादित होकर ऐसे शोभायमान हो रहे थे मानो उस अशोक वन में पुष्पों से बना हुआ पर्वत शोभायमान हो रहा हो ॥11॥
 
At that time, Hanuman, the son of the wind, being covered with those flowers, looked as beautiful as if a mountain made of flowers was looking beautiful in that Ashoka forest. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)