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ramayan 5.14.10: उड़ते हुए पक्षियों के पंखों से निकली हवा के कारण वहाँ के वृक्षों से तरह-तरह के रंग-बिरंगे फूल बरसने लगे।   |   ramayan सर्ग 5.14: हनुमान जी का अशोकवाटिका में प्रवेश करके उसकी शोभा देखना तथा एक अशोकवृक्ष पर छिपे रहकर वहीं से सीता का अनुसन्धान करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 14: हनुमान जी का अशोकवाटिका में प्रवेश करके उसकी शोभा देखना तथा एक अशोकवृक्ष पर छिपे रहकर वहीं से सीता का अनुसन्धान करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.14.10 
उत्पतद्भिर्द्विजगणै: पक्षैर्वातै: समाहता:।
अनेकवर्णा विविधा मुमुचु: पुष्पवृष्टय:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
उड़ते हुए पक्षियों के पंखों से निकली हवा के कारण वहाँ के वृक्षों से तरह-तरह के रंग-बिरंगे फूल बरसने लगे।
 
Due to the wind from the wings of the flying birds, the trees there started showering various kinds of colourful flowers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)