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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना
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श्लोक 9
श्लोक
5.13.9
रावणस्योरुवेगेन भुजाभ्यां पीडितेन च।
तया मन्ये विशालाक्ष्या त्यक्तं जीवितमार्यया॥ ९॥
अनुवाद
अथवा ऐसा भी प्रतीत होता है कि रावण के प्रचण्ड बल और उसकी भुजाओं की दृढ़ पकड़ से पीड़ित होकर बड़े-बड़े नेत्रों वाली आर्या सीता ने प्राण त्याग दिए॥9॥
Or it also seems that being tormented by the tremendous force of Ravana and the tight grip of his arms, Arya Sita of big eyes gave up her life.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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