श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  5.13.68 
तदुन्नसं पाण्डुरदन्तमव्रणं
शुचिस्मितं पद्मपलाशलोचनम्।
द्रक्ष्ये तदार्यावदनं कदा न्वहं
प्रसन्नताराधिपतुल्यवर्चसम्॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
मैं आर्या सीता का मुख कब देख सकूँगा, जिनकी नाक ऊँची और दाँत श्वेत हैं, जिनमें चेचक आदि के कोई दाग नहीं हैं, जो सदैव पवित्र मुस्कान की चमक से भरी रहती हैं, जिनके नेत्र खिले हुए कमल की पंखुड़ियों के समान सुन्दर हैं और जिनकी कान्ति निष्कलंक कलाधर के समान मनोहर है?॥ 68॥
 
When will I be able to see the face of Arya Sita, whose nose is high and whose teeth are white, who has no marks of smallpox etc., who is always filled with the glow of a pure smile, whose eyes are beautiful like the blooming lotus petals and who has a lovely radiance like the spotless Kaladhar?॥ 68॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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