श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 66-67
 
 
श्लोक  5.13.66-67 
वरुण: पाशहस्तश्च सोमादित्यौ तथैव च।
अश्विनौ च महात्मानौ मरुत: सर्व एव च॥ ६६॥
सिद्धिं सर्वाणि भूतानि भूतानां चैव य: प्रभु:।
दास्यन्ति मम ये चान्येऽप्यदृष्टा: पथि गोचरा:॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
धनुषधारी वरुण, सोम, आदित्य, महात्मा अश्विनीकुमार, समस्त मरुद्गण, समस्त भूत और भूतों के स्वामी तथा मार्ग में जितने भी दृश्य और अदृश्य देवता हैं, वे सभी मुझे सफलता प्रदान करेंगे ॥66-67॥
 
The bow-wielding Varun, Soma, Aditya, Mahatma Ashwini-Kumar, all the Marudgans, all the ghosts and the lords of ghosts and all the visible and invisible gods on the way, all of them will grant me success. 66-67॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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