श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  5.13.64 
संक्षिप्तोऽयं मयाऽऽत्मा च रामार्थे रावणस्य च।
सिद्धिं दिशन्तु मे सर्वे देवा: सर्षिगणास्त्विह॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
‘श्री रामचन्द्रजी के कार्य की सिद्धि के लिए तथा रावण से अदृश्य रहने के लिए मैंने अपना शरीर छोटा कर लिया है। ऋषियों सहित सभी देवता मुझे इस कार्य में सफलता प्रदान करें॥ 64॥
 
‘I have shrunk my body to make it small for the accomplishment of Shri Ramchandra's task and to remain invisible to Ravana. May all the gods including the sages grant me success in this task.॥ 64॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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