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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना
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श्लोक 60
श्लोक
5.13.60
स तेभ्यस्तु नमस्कृत्वा सुग्रीवाय च मारुति:।
दिश: सर्वा: समालोक्य सोऽशोकवनिकां प्रति॥ ६०॥
अनुवाद
इस प्रकार उन सबको तथा सुग्रीव को नमस्कार करके पवनपुत्र हनुमान ने चारों ओर देखा और फिर अशोक वाटिका में जाने के लिए तैयार हुए।
Having thus saluted them all as well as Sugreeva, Hanuman, the son of the wind, looked in all directions and then prepared to go to the Ashoka garden.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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