श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  5.13.56 
वसून् रुद्रांस्तथाऽऽदित्यानश्विनौ मरुतोऽपि च।
नमस्कृत्वा गमिष्यामि रक्षसां शोकवर्धन:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
मैं दैत्यों का शोक बढ़ाने वाला, वसुओं, रुद्र, आदित्य, अश्विनीकुमारों और मरुद्गणों को नमस्कार करके यहाँ से अशोक उद्यान में जाऊँगा॥56॥
 
I, the one who increases the grief of the demons, will go from here to Ashoka garden after saluting Vasu, Rudra, Aditya, Ashwini Kumar and Marudganas. 56॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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