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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना
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श्लोक 55
श्लोक
5.13.55
अशोकवनिका चापि महतीयं महाद्रुमा।
इमामधिगमिष्यामि नहीयं विचिता मया॥ ५५॥
अनुवाद
यहाँ एक बहुत बड़ी अशोक वाटिका है, उसके अन्दर बड़े-बड़े वृक्ष हैं। मैंने अभी तक उसका अन्वेषण नहीं किया है, अतः अब मैं उसके अन्दर जाकर खोज करूँगा॥ 55॥
‘This is a very large Ashok Vatika (grove) here, inside it are big trees. I have not yet researched it, so now I will go inside it and search.॥ 55॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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