श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  5.13.51 
इति चिन्तासमापन्न: सीतामनधिगम्य ताम्।
ध्यानशोकपरीतात्मा चिन्तयामास वानर:॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सीताजी को न पाकर वे चिन्ता में डूब गए। उनका मन सीता के चिन्तन और शोक में डूब गया। तब वीर वानर इस प्रकार सोचने लगे-॥51॥
 
In this way, on not finding Sitaji, he became immersed in worry. His mind got drowned in the thought of Sita and grief. Then the brave monkeys started thinking in this way -॥ 51॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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