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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना
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श्लोक 48
श्लोक
5.13.48
एवं बहुविधं दु:खं मनसा धारयन् बहु।
नाध्यगच्छत् तदा पारं शोकस्य कपिकुञ्जर:॥ ४८॥
अनुवाद
इस प्रकार अनेक प्रकार के दुःखों को मन में धारण किए हुए कपिकुञ्जर हनुमान्जी दुःख से पार न पा सके॥48॥
In this way, Kapikunjar Hanuman ji, carrying many types of sorrows in his mind, could not overcome the grief. 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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