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ramayan 5.13.4-5h: मैंने सभी छोटे-छोटे तालाब, झीलें, पोखरे, नदियाँ, जलाशयों के आसपास के जंगल और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ देखे। मैंने इस नगर के आसपास की सारी भूमि छान मारी; परन्तु मुझे कहीं भी जानकी नहीं दिखाई दी।   |   ramayan सर्ग 5.13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 4-5h
 
 
श्लोक  5.13.4-5h 
पल्वलानि तटाकानि सरांसि सरितस्तथा।
नद्योऽनूपवनान्ताश्च दुर्गाश्च धरणीधरा:॥ ४॥
लोलिता वसुधा सर्वा न च पश्यामि जानकीम्।
 
 
अनुवाद
मैंने सभी छोटे-छोटे तालाब, झीलें, पोखरे, नदियाँ, जलाशयों के आसपास के जंगल और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ देखे। मैंने इस नगर के आसपास की सारी भूमि छान मारी; परन्तु मुझे कहीं भी जानकी नहीं दिखाई दी।
 
‘I saw all the small ponds, lakes, ponds, rivers, forests around the bodies of water and the rugged mountains. I searched all the lands around this city; but I did not see Janaki anywhere.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)