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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना
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श्लोक 38
श्लोक
5.13.38
सोऽहं नैव गमिष्यामि किष्किन्धां नगरीमित:।
नहि शक्ष्याम्यहं द्रष्टुं सुग्रीवं मैथिलीं विना॥ ३८॥
अनुवाद
'इसीलिए मैं यहाँ से किष्किन्धापुरी नहीं जाऊँगा। मिथिला की पुत्री सीता को देखे बिना मैं सुग्रीव से भी नहीं मिल पाऊँगा।'
‘That is why I will not go to Kishkindapuri from here. Without seeing Mithila's daughter Sita, I will not be able to see Sugreeva either.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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