श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 13: सीताजी के नाश की आशंका से हनुमान्जी की चिन्ता, श्रीराम को सीता के न मिलने की सचना देने से अनर्थ की सम्भावना देख हनुमान का पुनः खोजने का विचार करना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  5.13.37 
घोरमारोदनं मन्ये गते मयि भविष्यति।
इक्ष्वाकुकुलनाशश्च नाशश्चैव वनौकसाम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
मैं सोचता हूँ कि जब मैं वहाँ जाऊँगा, तब भयंकर हाहाकार मचेगा। इक्ष्वाकु वंश नष्ट हो जाएगा और वानरों का भी नाश हो जाएगा॥ 37॥
 
‘When I go there, I think a terrible cry will be raised. The Ikshwaku clan will be destroyed and the monkeys will also be annihilated.॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)